गोंडा के बारे में क्या जानते हैं, नहीं जानते तो जान लीजिए

गोंडा के बारे में

इस मण्डल का नाम तुलसीपुर में स्थित माँ पाटेश्वरी देवी के नाम पर ” देवीपाटन ” रखा गया देवीपाटन मण्डल प्रदेश के पूर्वी सम्भाग में स्थित है यह मण्डल चार जिलो से मिल कर बना है जो कि निम्नलिखित है

गोंडा
बहराइच
बलरामपुर
श्रावस्ती

देवीपाटन मण्डल प्रदेश के पूर्वी सम्भाग में स्थित है देवीपाटन मण्डल 81.30 डिग्री से 32.40 डिग्री देशान्तर तथा 26.48 डिग्री उत्तरी अंक्षाश के मध्य राज्य के पूर्वांचल में उत्तर दिशा में स्थित है । मण्डल की उत्तरी सीमा नेपाल से लगी हुई है । मण्डल के पश्चिम में लखीमपुर व सीतापुर दक्षिण में फैजाबाद व बाराबंकी तथा पूरब में बस्ती व सिद्धार्थ नगर जनपद स्थित है देवीपाटन मण्डल का पूरा भू – भाग तराई क्षेत्र के नाम से जाना जाता है इस मण्डल में गोंडा , बहराइच , बलरामपुर और श्रावस्ती चार जनपद है . मण्डल के अंतर्गत चार जनपद , 13 तहसील , 44 सामुदायिक विकास खण्ड 457 न्यायपंचायते , 2958 ग्राम पंचायते है । कुल राजस्व ग्राम 4772 है जिसमे 4697 आबाद ग्राम है । इसके अतिरिक्त 7 नगर पालिका परिषद एवं 9 नगर पंचायते है मण्डल का भौगोलिक क्षेत्रफल 14230 वर्ग कि ० मी ० है । मण्डल का उत्तरी भाग वनों से भरा हुआ है । राप्ती , बूढी राप्ती , घाघरा , सरयू , सुआन , कुआनों तथा भकला आदि मण्डल की प्रमुख नदिया है . गोंडा , देवीपाटन मण्डल का मुख्यालय है जो कि देश के सभी राज्यों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है ।

स्वामी नारायण छापया

स्वामी नारायण छपिया मन्दिर गोंडा जिला मुख्यालय से 50 कि ० मी ० पूर्व और स्वामी नारायण छपिया रेलवे स्टेशन से 1.5 कि ० मी दक्षिण में स्थित है । यह स्थल हिन्दू संत स्वामी सहजानन्द ( घनश्याम पाण्डेय या स्वामी नारायण ) की पावन जन्म भूमि है जिनका जन्म 3 अप्रैल , 1781 ( चैत्र शुक्ल 9 , वि . संवत 1837 ) को हुआ था । स्वामी जी ने अनेक मंदिरों का निर्माण कराया , इनके निर्माण के समय वे स्वयं सबके साथ श्रमदान करते थे । धर्म के प्रति इसी प्रकार श्रद्धाभाव जगाते हुए स्वामी जी ने 1830 ई 0 में देह छोड़ दी ।

देवीपाटन शक्तिपीठ

गोण्डा से 70 किलोमीटर और तुलसीपुर से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर देवीपाटन शक्तिपीठ स्थित है । ऐसी मान्यता है कि यहाँ सती का वामस्कन्ध गिरा था । इस पीठ की स्थापना नाथ सम्प्रदाय के गुरु गोरखनाथ ने की थी । माना जाता है कि जिस जगह पर यह मन्दिर स्थित है उसका निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था । यह प्रसिद्ध स्थल 51 शक्तिपीठों में से एक है ।

श्रावस्ती

श्रावस्ती भगवान बुद्ध के लिए प्रसिद्ध है । भगवान बुद्ध का जन्म श्रावस्ती के कपिलवस्तु में हुआ था । आज श्रावस्ती में भगवान बुद्ध की बहुत से मन्दिर है जिनके दर्शन के लिए देश विदेश के लोग आते है ।

तिरर मनोरमा

गोण्डा शहर के उत्तर से २१ किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र स्थान स्थित । माना जाता है कि यहाँ पर मुनि उद्दालक का आश्रम स्थित है । इसके अलावा यहीं से मनोरमा नदी की उत्पत्ति हुई थी । साथ ही यहाँ पक्का घाट के साथ प्राचीन सरोवर और मण्दिर स्थित है । प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ मेले का आयोजन किया जाता है ।

कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग

यह भारत नेपाल सीमा पर बहराइच से लगभग 120 कि ० मी ० की दूरी पर स्थित है । यह ललगभग 551 वर्ग कि ० मी ० में फैला है यह एक हरा – भरा रहने वाला क्षेत्र है जहाँ बहुत से जीव जन्तु पाए जाते है । जिसमे बाघ , हाथी , तेंदुआ गैंडा , बारहसिंघा , चीतल आदि पाए जाते है

पृथ्वीनाथ मंदिर

पृथ्वीनाथ मंदिर , भगवान शिव का बहुत बड़ा मंदिर है जो कि गोंडा से लगभग 12 कि ० मी ० दूर इटियाथोक ब्लाक में पड़ता है । इस मंदिर का शिवलिंग बहुत ऊँचा है । यहाँ हर साल शिवरात्रि के दिन बहुत ही भव्य मेला लगता है ।

पसका

जिला मुख्यालय के दक्षिण – पश्चिम से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पसका सरयू नदी के तट पर स्थित है । यह काफी प्राचीन संगम स्नान स्थल है । पशु – योनि से मुक्ति पाने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान करने के लिये यहाँ आते हैं । ऐसा माना जाता है कि भगवान वराह ने इस जगह पर अवतार लिया था ।

गोस्वामी तुलसीदास जन्मस्थली

इसी जनपद के परसपुर ब्लाक के राजापुर नामक गाँव में रामचरितमानस के जैसे महाकाव्य के रचनाकार की जन्मस्थली भी है । सरयू नदी के उत्तर में राजापुर गाँव है जहाँ पर तुलसीदास का जन्म हुआ था । साथ ही साथ सूकरखेत में गोस्वामी जी के नरहरिदास की मूर्ति एक जीर्ण – शीर्ण मन्दिर में मौजूद है । गुरु

दरगाह हज़रत सैयद सालार मसउद गाजी

बहराइच जनपद की उत्तरी सीमा पर गाजी का प्रसिद्ध दरगाह स्थित है इसके प्रवेश द्वार को जंजीरी तथा भीतरी द्वार को नाल दरवाजा के नाम से जाना जाता है । यहाँ पर हर साल एक मेला आयोजित होता है जो लगभग एक माह तक चलता है ।

शोभनाथ मन्दिर

यह मन्दिर जैन धर्म का प्रतीक है जो श्रावस्ती जनपद में राप्ती नदी के किनारे बसा हुआ है इस मन्दिर का निर्माण लगभग 10 शताब्दी में हुआ था । इस मन्दिर को महेट के नाम से भी जाना जाता है । यह मन्दिर तीसरे जैन तीर्थांकर शोभनाथ की जन्म स्थली है

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