जल्द इलाज से पूर्णतया ठीक हो सकता है कुष्ठ रोग – सीएमओ

जल्द इलाज से पूर्णतया ठीक हो सकता है कुष्ठ रोग – सीएमओ

  • स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू, 14 फरवरी तक चलेगा

  • फतेहपुर। जिले में कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान की शुरूआत हो गई है। आम जनता में कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिये जनपद में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया गया है। यह अभियान 14 फरवरी तक चलेगा। जिलाधिकारी के संदेश के साथ कार्यक्रम का आगाज किया गया। यह कहना है सीएमओ डा0 राजेंद्र सिंह का।

  • सीएमओ ने बताया कि समाज में आज भी कुष्ठरोग एवं रोगियों को स्वीकारा नहीं जाता है। यही कारण है की व्यक्ति अपनी इस बीमारी को समाज से छुपाता है जो कि जांच और इलाज में भी देरी का कारण बनती है। यह रोग कोई कलंक नहीं है, बल्कि दीर्घकालीन संक्रामक रोग है, जो माइक्रोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से फैलता है। यह हाथ-पैरों की परिधीय तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकोसा और श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यदि कुष्ठ रोग की पहचान और उपचार शीघ्र न हो तो यह स्थाई विकलांगता का कारण बन जाता है।
    जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान शहरी व ग्रामीण क्षेत्रो में चित्रकारी व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का क्रियान्वयन ग्राम स्तर पर आशा कार्यकर्ताके साथ-साथ ग्राम सेवकों, स्कूल अध्यापकों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों,उप केन्द्रों के स्टाफ के द्वारा सक्रिय सहभागिता के साथ किया गया। साथ ही बताया कि जागरूकता के अभाव में समाज में कुष्ठ रोग के प्रति कलंक व भेदभाव के चलते कुष्ठ रोग के प्रति गलतफहमी है।
    इसको दूर करने के उद्देश्य से पांच वर्षों के दौरान स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। इस वर्ष भी कुष्ठ रोग निवारण दिवस के मौके पर ग्राम सभा स्तर तक कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता के लिए गतिविधियों का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि जिले में इस समय 42 कुष्ठ रोगियों का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा अप्रैल 2021 से अब तक 56 कुष्ठ पीड़ित मरीजों को सही किया गया है।

कुष्ठ रोग दो तरह का होता है

पोसीवेस्लरी कुष्ठ रोग दृ शरीर पर 05 या उससे कम दाग हों तो उसे इस श्रेणी में डाला जाता है। इस रोग में इन्फेक्शन कम होता है और इसका इलाज 06 माह में पूरा हो जाता है।

मल्टीवेस्लरी कुष्ठ रोग दृ शरीर पर 05 से अधिक धब्बे होने पर उसे इस श्रेणी में रखा जाता है। यह नस को भी प्रभावित करता है, जिससे नस में मोटापन या कड़ापन आता है। इसका इलाज 12 माह चलता है।

कुष्ठ के लक्षण

ऽ हल्के और लाल रंग के धब्बे ।
ऽ त्वचा के दाग धब्बों में संवेदनहीनता
ऽ हाथ या पैरों में अस्थिरता या झुनझुनी
ऽ हाथ, पैरों या पलकों में कमजोरी
ऽ नस में दर्द, चेहरे, कान में सूजन या घाव

ऽ हाथ या पैरों में दर्द रहित घाव

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